♦️♦️5-JUNE 2020♦️♦️
♦️♦️🌊कबीर प्रकट दिवस🌊♦️♦️
कबीर जयंती और कबीर प्रकट दिवस में अंतर
जो जन्मता है उसकी जयंती मनाई जाती है, जो अजन्मा है, स्वयंभू है, वह प्रकट होता है। कबीर साहेब, अमर पुरूष लीला करते हुए बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होते हैं।
इन पंक्तियों में कबीर साहेब जी की महिमा का गुणगान किया गया।
*गरीब, भक्ति मुक्ति ले उतरे, मेटन तीनूं ताप।*
*मोमन के डेरा लिया, कहै कबीरा बाप।।*
कबीर साहेब जयंती VS कबीर साहेब प्रकट दिवस
कबीर साहेब ने अपनी वाणियों में स्पष्ट किया है, कि उनका जन्म नहीं होता।
ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।
माता पिता मेरे कछु नाही, ना मेरे घर दासी।
जुलहे का सुत आन कहाया, जगत करे मेरी हांसी।।
साहेब का जन्म नहीं होता!
आदरणीय गरीब दास जी ने भी अपनी वाणी के माध्यम से यह बताया है कि परमात्मा कबीर जी की कोई माता नही थी अर्थात उनका जन्म माँ के गर्भ से नही हुआ।
गरीब, अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बंदीछोड़ कहाय।
सो तो एक कबीर हैं, जननी जन्या न माय।।
अवश्य देखे सन्त रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन साधना चेनल पर शाम 7:30 से 8:30
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कबीर प्रकट दिवस पर विशेष प्रसारण सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक साधना चेनल पर
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