Holy Scriptures

Friday, May 29, 2020

God is real.

The body of God is not of the five elements composed of the sum of the nadis. One is made of noor element. Whenever full God appears here, they never take birth from their mother because they originate everything.


 Kabir, the divine, takes another form and manifests himself by appearing and performing his lila. At that time, the devotees who want God to come to Leela are unable to recognize them, because all the sages and those who have been called saints have called God formless. God is actually in shape. Human beings have a similar body.
Must see Sant Rampal Ji Maharaj's Mangal discourse on Sadhana Channel 7:30 to 8:30 pm

Wednesday, May 20, 2020

Untimely natural disaster

         असमय प्राकृतिक आपदाए(अम्फान चक्रवात)

आज देश न जाने कितनी बड़ी महामारी सेेे गुजर रहा है और इसी बीच एक बड़ी प्राकृतिक आपदा "अम्फान चक्रवात"भी देश में प्रवेेेश कर जाता  है जो काफी नुकसानदायक है।
थाईलैंड ने इस सुपर साइक्लोन को‘अम्फान’ नाम दिया है।सुपर साइक्लोन का मतलब ऐसा प्रचंड चक्रवात है जो अपने मार्ग में आने वाले इलाकों में भारी तबाही मचाता है।चक्रवात समुद्र से ताकत हासिल करते है फिर यह पृथ्वी की ओर बढ़ते है फिर यह मानव सभ्यता के लिए बहुत ही हानिकारक बन जाते हैं और ना जाने कितने घरों को उजाड़ देते हैं।



अम्फान चक्रवात अपने प्रचंड वेग और ऊर्जा के साथ 150 से 250 किमी की रफ्तार से पृथ्वी की सतह से टकराता है।इसके चलते भीषण आंधी आती है,पेड़-पौधें उखड़ जाते हैं,समुद्र का पानी तटीय इलाकों में प्रवेश कर जाता है और कमजोर घर ढह जाते हैं।इससे जान और माल दोनों को नुकसान होता है।
तमाम सरकारें और संस्थाएं चक्रवात के पूर्वानुमान होने से चक्रवात प्रभावित इलाकों से लोगों को दूर कर देते हैं और हर संभव कोशिश करते हैं कि किस तरह से प्राप्त प्राकृतिक आपदा से बचा जा सके। वर्तमान में कोरोना महामारी भी चरम सीमा पर है।कई मजदूर अपने घर जाना चाहते हैं लेकिन सरकार ने प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए जो श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई थीं, अम्फान तूफान के प्रभाव में आने वाले इलाकों में जाने वाली श्रमिक ट्रेन को रद कर दिया गया है।
ऐसी प्राकृतिक आपदाएं न जाने कितनी बार आती ह लेकिन इन प्राकृतिक आपदाओं का समाधान आध्यात्मिक शक्ति से ही संभव है। न्यूजर्सी अमेरिका की प्रसिद्ध भविष्यवक्ता फ्लोरेंस ने  संत रामपाल जी महाराज के बारे में भविष्यवाणी करते हुए कहा कि वह संत प्राकृतिक परिवर्तन भी कर सकता है। अथार्त प्राकृतिक आपदाओं को भी रोक सकता है।संत रामपाल जी महाराज ही ऐसे संत हैं जो विश्व को आध्यात्मिक मार्ग की तरफ ले जा रहे हैं और दिन प्रतिदिन उनका ज्ञान तोप के गोले के समान तीव्र गति से फैल रहा है।


और अधिक जानने के लिए अवश्य देखें संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन साधना चैनल पर शाम 7:30 से 8:30


Wednesday, May 13, 2020

The threat to the environment is increasing

           पर्यावरण पर बढ़ता खतरा और उपाय

हमारा पर्यावरण धरती पर स्वस्थ जीवन को अस्तित्व में रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फिर भी हमारा पर्यावरण दिन-प्रतिदिन मानव निर्मित तकनीक तथा आधुनिक युग के आधुनिकरण के वजह से नष्ट होता जा रहा है। इसलिए आज हम पर्यावरण प्रदुषण जैसे सबसे बड़े समस्या का सामना कर रहे हैं।पर्यावरण प्रदुषण वातावरण में विभिन्न प्रकार के बीमारीयों को जन्म देता है, जिसे व्यक्ति जीवन भर झेलता रहता है। यह किसी समुदाय या शहर की समस्या नहीं है बल्कि दुनिया भर की समस्या है तथा जल प्रदुषण द्वारा विभिन्न प्रकार के रोग तथा विकार का जन्म होता है जो हमारे जीवन को खतरे में डालते हैं। फैक्ट्रीयो और वाहनों से निकलते हुए धुँए और कचरे से वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण हो रहा है।इसके साथ साथ वाहनों से निकलने वाले धुँए से भी वायु प्रदूषण काफी हद तक हो रहा है। इससे हमारे पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा है।


तमाम सरकारें और संस्थाएं पर्यावरण को बचाने के लिए अहम कदम उठा रहे हैं।
"स्वस्थ भारत अभियान" भारत सरकार द्वारा आरम्भ किया गया राष्ट्रीय स्तर का अभियान है जिसका उद्देश्य गलियों, सड़कों को साफ-सुथरा करना है। यह अभियान महात्मा गाँधी जयंती 02 अक्टूबर 2014 को आरम्भ किया गया।पर्यावरण की गुणवत्ता की इस कमी में प्रभावी नियंत्रण व प्रदूषण के परिप्रेक्ष्य में सरकार ने समय-समय पर अनेक कानून व नियम बनाए। इनमें से अधिकांश का मुख्य आधार प्रदूषण नियंत्रण व निवारण था।लेकिन फिर भी बढते औद्योगिकरण के कारण पर्यावरण में निरंतर प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है ।




एक महान तत्वदर्शी संत संत रामपाल जी महाराज है जो समाज में फैली बुराइयों को मिटाने के साथ-साथ पर्यावरण को बचाने के लिए भी बड़ी मुहिम चला रहे हैं वह अपने शिष्यों को कहीं भी कचरा नहीं फैलाने की शिक्षा देने के साथ-साथ शास्त्र अनुकूल ज्योति हवन यज्ञ करवाते हैं।यह ज्योति और हवन यज्ञ देसी घी से होता है जिससे पर्यावरण संरक्षण में काफी मदद होती है और संत रामपाल जी महाराज अनेक शास्त्र अनुकूल यज्ञ करवाते हैं।यज्ञ करने से वर्षा होती है वर्षा होने से धरती पर पानी की कमी दूर हो जाती है।अच्छी फसल होती है और पर्यावरण भी सुरक्षित होता है अवश्य देखें संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन साधना चैनल पर शाम 7:30 से 8:30





Devotion against the scriptures (wrong devotion)


  शास्त्र विरुद्ध साधना करना आत्महत्या करने के समान है।

वर्तमान में धार्मिक पाखण्ड चरम सीमा पर है।मन्दिरो में बैठे पंडित भोले श्रदालुओ को लूट रहे हैं।मूर्ति पूजा चरम सीमा पर है लोग देवी देवताओं की मूर्तियों को स्नान करवाते हैं उन्हें वस्त्र पहनाते है,तिलक लगाते हैं,उन पर फूल चढ़ाते हैं और भोजन बनाकर उनके मुंह पर लगाते हैं और उन पत्थर की मूर्तियों से अपने परिवार के लिए  सुख शांति मांगते हैं जो कि एक शास्त्र विरुद्ध साधना है।लोग शास्रो में बताए अनुसार साधना न करके काफी दुःखी है क्योंकि उनको किसी प्रकार का लाभ नही मिल रहा है।लाभ नही मिलने के कारण लोग नास्तिक हो रहे हैं और भगवान से दूर हो रहे हैं साथ मे लोग सोचते हैं कि भगवान जैसी कोई चीज वास्तव में होती ही नही।



आजकल श्राद्ध,तीर्थ,व्रत और ना जाने कितने शास्त्र विरुद्ध काम हो रहे हैं। जिनको भोले श्रद्धालु भगवान की प्राप्ति के लिए करते हैं और पंडित लोग उनको इन शास्त्र विरूद्ध कामों में जगह-जगह पर ठगते हैं।मनुष्य जीवन परमात्मा की भक्ति करने के लिए मिला है लेकिन हम शास्त्र विधि विरुद्ध  मनमाना आचरण करके अपने मनुष्य जीवन को बर्बाद कर रहे हैं। शास्त्र विरुद्ध साधना करने से ना तो इस लोक में सुख मिलता है और ना ही परलोक में सुख मिलता है अर्थात शास्त्र विरुद्ध साधना करना आत्महत्या करने के समान है क्योंकि इससे मनुष्य जीवन का महत्व नष्ट हो जाता है और सही भक्ति नही करने के कारण मनुष्य मरने के पश्चात 84 लाख योनियों में भटकता है।



आज के समय में संत रामपाल जी महाराज ही ऐसे संत हैं जो शास्त्रों के अनुकूल साधना करवाते हैं और शास्त्र विरुद्ध साधना को छुड़वाते हैं।संत रामपाल जी महाराज ने शास्त्रों में छुपे गूढ़ रहस्यो को उजागर किया और बताया कि तीर्थ,व्रत,श्राद्ध और मूर्तियों को नहलाना,कपड़े पहनाना ,उनको भोजन खिलाने का पाखण्ड करना आदि सभी क्रियाए शास्रो मे वर्जित है।
सन्त रामपाल जी महाराज ने बताया कि श्रीमद्भगवद गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23 और 24 में निर्देश है कि जो  साधक शास्त्रों के अनुसार बताई गई भक्ति ना करके उनके अतिरिक्त क्रियाएं करता है तो उसको न तो सुख की प्राप्ति होती है और न सिद्धि अर्थात न ही आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है और न ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। संत रामपाल जी महाराज ने सर्व शास्त्रों (पवित्र गीता जी,पवित्र चारो वेद,पवित्र कुरान शरीफ और पवित्र बाइबल आदि सभी) से सिद्ध किया है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ही है


और अधिक जानने के लिए अवश्य देखे  सन्त रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन साधना चेनल पर शाम 7:30 से 8:30 बजे तक।



Kabir Prakat Diwas

 ♦️♦️5-JUNE 2020♦️♦️               ♦️♦️🌊कबीर प्रकट दिवस🌊♦️♦️  कबीर जयंती और कबीर प्रकट दिवस में अंतर जो जन्मता है उसकी जयंती मनाई जाती है,...