Holy Scriptures

Wednesday, May 13, 2020

Devotion against the scriptures (wrong devotion)


  शास्त्र विरुद्ध साधना करना आत्महत्या करने के समान है।

वर्तमान में धार्मिक पाखण्ड चरम सीमा पर है।मन्दिरो में बैठे पंडित भोले श्रदालुओ को लूट रहे हैं।मूर्ति पूजा चरम सीमा पर है लोग देवी देवताओं की मूर्तियों को स्नान करवाते हैं उन्हें वस्त्र पहनाते है,तिलक लगाते हैं,उन पर फूल चढ़ाते हैं और भोजन बनाकर उनके मुंह पर लगाते हैं और उन पत्थर की मूर्तियों से अपने परिवार के लिए  सुख शांति मांगते हैं जो कि एक शास्त्र विरुद्ध साधना है।लोग शास्रो में बताए अनुसार साधना न करके काफी दुःखी है क्योंकि उनको किसी प्रकार का लाभ नही मिल रहा है।लाभ नही मिलने के कारण लोग नास्तिक हो रहे हैं और भगवान से दूर हो रहे हैं साथ मे लोग सोचते हैं कि भगवान जैसी कोई चीज वास्तव में होती ही नही।



आजकल श्राद्ध,तीर्थ,व्रत और ना जाने कितने शास्त्र विरुद्ध काम हो रहे हैं। जिनको भोले श्रद्धालु भगवान की प्राप्ति के लिए करते हैं और पंडित लोग उनको इन शास्त्र विरूद्ध कामों में जगह-जगह पर ठगते हैं।मनुष्य जीवन परमात्मा की भक्ति करने के लिए मिला है लेकिन हम शास्त्र विधि विरुद्ध  मनमाना आचरण करके अपने मनुष्य जीवन को बर्बाद कर रहे हैं। शास्त्र विरुद्ध साधना करने से ना तो इस लोक में सुख मिलता है और ना ही परलोक में सुख मिलता है अर्थात शास्त्र विरुद्ध साधना करना आत्महत्या करने के समान है क्योंकि इससे मनुष्य जीवन का महत्व नष्ट हो जाता है और सही भक्ति नही करने के कारण मनुष्य मरने के पश्चात 84 लाख योनियों में भटकता है।



आज के समय में संत रामपाल जी महाराज ही ऐसे संत हैं जो शास्त्रों के अनुकूल साधना करवाते हैं और शास्त्र विरुद्ध साधना को छुड़वाते हैं।संत रामपाल जी महाराज ने शास्त्रों में छुपे गूढ़ रहस्यो को उजागर किया और बताया कि तीर्थ,व्रत,श्राद्ध और मूर्तियों को नहलाना,कपड़े पहनाना ,उनको भोजन खिलाने का पाखण्ड करना आदि सभी क्रियाए शास्रो मे वर्जित है।
सन्त रामपाल जी महाराज ने बताया कि श्रीमद्भगवद गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23 और 24 में निर्देश है कि जो  साधक शास्त्रों के अनुसार बताई गई भक्ति ना करके उनके अतिरिक्त क्रियाएं करता है तो उसको न तो सुख की प्राप्ति होती है और न सिद्धि अर्थात न ही आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है और न ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। संत रामपाल जी महाराज ने सर्व शास्त्रों (पवित्र गीता जी,पवित्र चारो वेद,पवित्र कुरान शरीफ और पवित्र बाइबल आदि सभी) से सिद्ध किया है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ही है


और अधिक जानने के लिए अवश्य देखे  सन्त रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन साधना चेनल पर शाम 7:30 से 8:30 बजे तक।



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